Kaal chakra: festival

कुंडली में किस ग्रह के खराब प्रभाव से जीवन में क्या असर पड़ता है |
छोटी – छोटी उपायों से ख़राब ग्रहों को कैसे ठीक करे |

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about dussehra festival in hindi

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  dussehra festival - 04 october 2022
दशहरा (विजयदशमी या आयुध-पूजा) हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है।अश्विन (क्वार) मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को इसका आयोजन होता है।
भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था तथा देवी दुर्गा ने नौ रात्रि एवं दस दिन के युद्ध के उपरान्त महिषासुर पर विजय प्राप्त किया था। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है।

 इसीलिये इस दशमी को "विजयादशमी" के नाम से जाना जाता है (दशहरा = दशहोरा = दसवीं तिथि)। दशहरा वर्ष की तीन अत्यन्त शुभ तिथियों में से एक है, अन्य दो हैं चैत्र शुक्ल की एवं कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा।

इस दिन लोग शस्त्र-पूजा करते हैं और नया कार्य प्रारम्भ करते हैं (जैसे अक्षर लेखन का आरम्भ, नया उद्योग आरम्भ, बीज बोना आदि)। ऐसा विश्वास है कि इस दिन जो कार्य आरम्भ किया जाता है उसमें विजय मिलती है। प्राचीन काल में राजा लोग इस दिन विजय की प्रार्थना कर रण-यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे। इस दिन जगह-जगह मेले लगते हैं। रामलीला का आयोजन होता है। रावण का विशाल पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है। दशहरा अथवा विजयदशमी भगवान राम की विजय के रूप में मनाया जाए अथवा दुर्गा पूजा के रूप में, दोनों ही रूपों में यह शक्ति-पूजा का पर्व है, शस्त्र पूजन की तिथि है। हर्ष और उल्लास तथा विजय का पर्व है। भारतीय संस्कृति वीरता की पूजक है, शौर्य की उपासक है। व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है। दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों-काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी के परित्याग की सद्प्रेरणा प्रदान करता है।

 

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दीवाली या दीपावली अर्थात "रोशनी का त्योहार" शरद ऋतु (उत्तरी गोलार्द्ध) में हर वर्ष मनाया जाने वाला एक प्राचीन हिंदू त्योहार है। दीवाली भारत के सबसे बड़े और प्रतिभाशाली त्योहारों में से एक है। यह त्योहार आध्यात्मिक रूप से अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है।
भारतवर्ष में मनाए जाने वाले सभी त्यौहारों में दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है। इसे दीपोत्सव भी कहते हैं। ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ अर्थात् ‘अंधेरे से ज्योति अर्थात प्रकाश की ओर जाइए’ यह उपनिषदों की आज्ञा है। इसे सिख, बौद्ध तथा जैन धर्म के लोग भी मनाते हैं। जैन धर्म के लोग इसे महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में मनाते हैं  तथा सिख समुदाय इसे बंदी छोड़ दिवस (en:Bandi Chhor Divas) के रूप में मनाता है।
माना जाता है कि दीपावली के दिन अयोध्या के राजा श्री रामचंद्र अपने चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात लौटे थे।  अयोध्यावासियों का ह्रदय अपने परम प्रिय राजा के आगमन से उल्लसित था। श्री राम के स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दीए जलाए। कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की वह रात्रि दीयों की रोशनी से जगमगा उठी। तब से आज तक भारतीय प्रति वर्ष यह प्रकाश-पर्व हर्ष व उल्लास से मनाते हैं। 

यह पर्व अधिकतर ग्रिगेरियन कैलन्डर के अनुसार अक्टूबर या नवंबर महीने में पड़ता है। दीपावली दीपों का त्योहार है। भारतीयों का विश्वास है कि सत्य की सदा जीत होती है झूठ का नाश होता है। दीवाली यही चरितार्थ करती है- असतो माऽ सद्गमय, तमसो माऽ ज्योतिर्गमय। दीपावली स्वच्छता व प्रकाश का पर्व है। कई सप्ताह पूर्व ही दीपावली की तैयारियाँ आरंभ हो जाती हैं। लोग अपने घरों, दुकानों आदि की सफाई का कार्य आरंभ कर देते हैं। घरों में मरम्मत, रंग-रोगन, सफ़ेदी आदि का कार्य होने लगता है। लोग दुकानों को भी साफ़ सुथरा कर सजाते हैं। बाज़ारों में गलियों को भी सुनहरी झंडियों से सजाया जाता है। दीपावली से पहले ही घर-मोहल्ले, बाज़ार सब साफ-सुथरे व सजे-धजे नज़र आते हैं।
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दीपावली का महत्त्व 


दीपावली नेपाल और भारत में सबसे सुखद छुट्टियों में से एक है। लोग अपने घरों को साफ कर उन्हें उत्सव के लिए सजाते हैं। नेपालियों के लिए यह त्योहार इसलिए महान है क्योंकि इस दिन से नेपाल संवत में नया वर्ष शुरू होता है।
दीपावली नेपाल और भारत में सबसे बड़े शॉपिंग सीजन में से एक है; इस दौरान लोग कारें और सोने के गहनों के रूप में भी महंगे आइटम तथा स्वयं और अपने परिवारों के लिए कपड़े, उपहार, उपकरणों, रसोई के बर्तन आदि खरीदते हैं। लोगों अपने परिवार के सदस्यों और दोस्तों को उपहार स्वरुप आम तौर पर मिठाइयाँ व सूखे मेवे देते हैं। इस दिन बच्चे अपने माता-पिता और बड़ों से अच्छाई और बुराई या प्रकाश और अंधेरे के बीच लड़ाई के बारे में प्राचीन कहानियों, कथाओं, मिथकों के बारे में सुनते हैं। इस दौरान लड़कियाँ और महिलाऐं खरीदारी के लिए जाती हैं और फर्श, दरवाजे के पास और रास्तों पर रंगोली और अन्य रचनात्मक पैटर्न बनाती हैं। युवा और वयस्क आतिशबाजी और प्रकाश व्यवस्था में एक दूसरे की सहायता करते हैं।

क्षेत्रीय आधार पर प्रथाओं और रीति-रिवाजों में बदलाव पाया जाता है। धन और समृद्धि की देवी - लक्ष्मी या एक से अधिक देवताओं की पूजा की जाती है। दीवाली की रात को, आतिशबाजी आसमान को रोशन कर देती है। बाद में, परिवार के सदस्यों और आमंत्रित दोस्त भोजन और मिठायों के साथ रात को मनाते हैं।


दीपावली का आर्थिक महत्त्व


दीवाली का त्यौहार भारत में एक प्रमुख खरीदारी की अवधि का प्रतीक है। उपभोक्ता खरीद और आर्थिक गतिविधियों के संदर्भ में दीवाली, पश्चिम में क्रिसमस के बराबर है। यह पर्व नए कपड़े, घर के सामान, उपहार, सोने और अन्य बड़ी खरीददारी का समय है। इस त्योहार पर खर्च और खरीद को शुभ माना जाता है क्योंकि लक्ष्मी को, धन, समृद्धि, और निवेश की देवी माना जाता है। दीवाली भारत में सोने और गहने की खरीद का सबसे बड़ा सीजन है।  मिठाई, कैंडी और आतिशबाजी की खरीद भी इस दौरान अपने चरम सीमा पर रहती है। प्रत्येक वर्ष दीवाली के दौरान पांच हज़ार करोड़ रुपए के पटाखों अदि की खपत होती है।

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शुभ दीपावली
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Holi || होली के दिन किसकी करे पूजा किस रंग से खेले होली

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07 मार्च 2023 को होली है 

होली के दिन क्या करने से आपको लाभ होगा । 

जो लोग कारोबार करते है और उनको लगातार घाटा हो रहा है, अपने भी मुह भेर रहे है तो होली वाले दिन अपने घर में 60 या 100ग्राम के चादी का हाथी बना कर के अपने ड्राइंग रूम में जरुर लगाइए | दुकान और कारोबार में भयदा नही हो रहा है तो होली पर इकाझी नारियल अगर आपको मिल जाये तो उसकी पूजा कर के लाल रंग के कपडे में लपेट कर के स्फटिक के श्रीयन्त्र के साथ अपनी दुकान या फक्ट्री में स्थापित करे दे| कारोबार में लाभ के लिए एक गुलाल के पैकेट में , एक चादी का सिका और एक मोती संक रखकर के लाल रंग के कपडे में लपेट कर के अपनी तिजोरी में रखे ही संदेह आपको लाभा मिलेगा | किसी के घर में बरकत नही हो रही है तो

होली के दिन हनुमान जी के किसी सिध्द प्राचीन मंदिर में जा कर के 7 बतासे , 1 जनेऊ जो हलती से रंगी हुआ हो , और एक बना हुआ पान अर्पित करे | और होली के बाद 3 मंगर लगातार करे |

आप जानते है की शनि देव की जितनी भी ख़राब प्रभाव हो | यदि आप हनुमान की उपासना करते है | तो शनि देव कभी भी आपका अनिष्ट नही कर सकते है | जो लोग

होली के दिन हनुमान की उपासना करेगे उनको शनि कभी भी पीड़ा नही दे सकते |

जो लोग बिदेश जाना चाहते है | विदेश यात्रा आपके लिए जरुरी है | और किसी करण बस आपके विदेश यात्रा में रुकबटे आ रही है |

तो आपको होली के इस पवन त्यौहार कर क्या करना चाहिए | वोह पर आपका आजीवका है तो आपको होली के दिन से हर रोज विष्णु सहसनाम या नारायण कवच के तिन पाठ तिस दिनों तक करे | तो आपकी मनोकाना पूरी होगी |

होली कैसे मनाया जाता है ।

होली के रंगों भरी और उत्साह से भरी भारतीय तिवारी जो भारत के विभिन्न हिस्सों में मनाया जाता है होली को मनाने के लिए कुछ खास तैयारी करनी पड़ती है ।
जैसे
रंगों की तैयारी:- होली के रंग आमतौर पर गुलाल और अबीर के रूप में उपयोग किए जाते हैं गुलाल हम तौर पर मैं दें और गेहूं के आटे रंगों और पानी का मिश्रण बनाकर तैयार किया जाता अभी रुको लाल पीला हरा नीला गुलाबी रंगों में बनाया जाता है ।
होली में पिचकारी कहो ना जरूरी माना जाता :- पिचकारी होली का हिस्सा है जिसे पाने से भरा जाता है और फिर उनके लिए तैयार की है जिसका उपयोग करते हैं

विशेष प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं । होली के मौके पर भारतीय खाद्य पदार्थों की विविधता देखी जा सकती है मिठाई बनाना होली के दौरान एवं गतिविधियां गुजिया लड्डू बर्फी आद  न मिठाई होली के दौरान उपयोग किए जाते हैं खासकर बिहार राज में होली ।

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holika dahan 2023 | होलिका दहन पर एक चमत्कारी दिशा , एक अचूक मंत्र , एक असरदार लकड़ी औऱ एक माह उपाये जो सबारेगे आपकी किस्मत

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holika dahan
होलिका दहन होली के एक दिन पहले के दिन किया जाता है | भद्रकाल में होलिका दहन नही किया जाता है | आज शाम 6:23 से 8:23 के का समय सही है |
शास्रो में कहा गया है की

होलिका

के समय हवा पूर्व दिशा से चले तो अच्छा मन जाता है और समाज में खुशियाली लती है पुरे साली खुस माये रहेगा | होलिका के समय हवा उतर दिशा से चलने लगे तो इससे आर्थिक छेत्र में उनत्ती आयगी और फसल अछि होगी | होलिका दहन के समय अगर दक्षिण से हवा चले हो इससे अपशकुन मन चाहता है ये खास कर फसलो को नुकशान करता है और इससे किसानो की कमर टूट जाती है | और जब देश के किशा की ही कमर टूट जाये तो समाज में खुशहाली कैसे आयगी | होलिका दहन के समय धुआ सीधा जाने लगे तो समज लीजिये की बदलाव की और इशारा करता है | अगर हवा पश्छिम दिशा से चलने लगे ये भी एक अच्छा संकेत नही बना जायगा | कहते है की इससे फसलो पर बुरा परभाव परता है और फसल आधी रह जाती है |

होलिका दहन के राख से कैसे होगी आपकी किस्मत बुलंद क्या करे जिससे आपको हो लाभ ही लाभ

आहार किसी के जीवन में बहुत नेगेटिविटी है तो कैसे होलिका के राख से उसकी नेगेटिविटी पाजिटिविटी में बदल जायगी | घर से नेगेटिविटी ख़त्म करने के लिए घर के चारो दिशाओ में छिरके जो दिखाई न दे | आपके घर में किसी पारकर का टोका टोटका या आपके किसी बुरे काले जादू का असर है वो भी सब होलिका के राख में जल के नस्ट हो जायगी | अगर घर का कोई सदस्य बीमार रहता है | तो आप होलिका के राख से दूर होगी | जो लोग बहुत

कठिन परिश्रम में बाद भी सफलता नही मिल रही है

तो उन्हें हर दिन होलिका के राख से तिलक करने पर उनको जरुर सफलता मिलेगे |

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lakshmee pooja mein rakhee jaane vaalee cheeje

16:23

laksmi pooja

लक्ष्मी पूजा  date 14-11-2020

दीपावली  में माँ लक्ष्मी के चरणों में क्या रखना चाहिए

लक्ष्मी पूजा में रखी 10 चमत्कारी चीजे |


 दीपावली में माँ लक्ष्मी के सामने एक एक सामान या आपके पूजा साथ में रखा जाता है उसका अपना एक महत्व होता है |  उस महत्व के परिणाम सरूप आपके मन में  नकारात्मक और सकारात्मक  उर्जा का निर्माण होता है | इसके बाद आपका मान जैसा बनता है वोयेसा प्रकृति आपके साथ बेवहार करती है |

       यंत्र राज, श्री यंत्र , लक्ष्मी यंत्र   इस दीपावली माँ लक्ष्मी की प्रतिमा के पास लछमी यंत्र रखे | यंत्र के सामने एक अखंड दीप जलाये कम से कम 24 घंटे के लिए | पुरी पूजा करने के बादइत्र में रुई को गिला कर के छोटी छोटी गोलिया बनाकरयंत्र पर अर्पित करे | पांच तरह के मेवे का भोग लगाए| माँ लक्ष्मी को लाल चुनरीचड़ाए | पूजा के बाद लछ्मी यंत्र अपने धान स्थान या गल्ले में रखे | आपको आर्थिक संकट से मुक्ति मिलेगी, निवेश से लाभ होगा | तीनश्री यंत्र रख सकते है , लेकिन गणेश की मुर्तिया नही होनी चाहिए एक साथ पर |


दीपावली पूजा में माँ लक्ष्मी  के पास श्रीयंत्र की स्थापना कर सकते है | श्रीयंत्र पर कुमकुम, चंदन , गोरोचन, अछत, हलती और केसर अर्पित करे|
शहद से यंत्र का अभिषेक करके गंगाचल अर्पित करे | श्री सुत्राम के मंत्रो का पढ़ते हुए श्री यंत्र का अभिषेक करना चाहिए | श्रीयंत्र पर कमल के फूल अर्पित करनी चाहिए | पान के पते पर गुड़ रखकर भोग लगाना चाहिए |माँ लक्ष्मी को भी कासे की कटोरी में रख कर के शहद अर्पित करना चाहिए | पूजा के बाद अपनी तिजोरी में श्रीयंत्र की स्थापना कर दे |

कारोवार में सचमच नुकसान हो रहा है तो दीपावली की पूजा में कमल गाटे की माला पर लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति स्थापित करके पूजा करे और दुसरे दिन इसे  अपने  तिजोरी में रख ले | कमल गाटेकी माला पर  मूर्ति यैसे रखना चाहिए की वो गिरे नही और अच्छे से रखा जा सके | 
दीपावली पूजा में माँ लक्ष्मी  के पास दछिनावर्ती शंख की स्थापना पीले रंग के रेशमी कपडे पर करे | कहा जाता है की ये शंख बज जाये के सृष्टी में प्रलये आ जायगा | पचामृत से  दछिणावर्ती शंख  का अभिषेक करके गंगाजल अर्पित करे | पीपल के पत्ते पर फल रखकर भोग लगाए |  माँ लछ्मी को काजल की डिब्बी और मिट्टी के 4 दिए जलाकर अर्पित करे | दीपावली के बाद हर दिन दछिनावर्ती शंख की पूजा करे | जिससे आपके घर से दुःख और दरिद्रता दूर हो जायगी |



जिन लोगो का पैसा हमेशा बेकार के कार्यो में खर्च हो जाता है जेसे रोग  बीमारी  दवाई, बेयजपर पैसा  खर्च हो रहा है तो आप ये मान ले की ये आपका दुरभाग है |  कानूनी मामले से परेशान है और उसमे पैसे इतने खर्च हो रहे है जोसमझ में नही आ रही है तो यैसे स्थिति में  घर में दीवापली में  माँ लछ्मी की प्रतिमा के सामने 21 कौड़िया रखनी चाहिए | कौड़ियो का दूध से अभिषेक करके गंगाजाल अर्पित करे | लाल रंग का कपड़ा चढ़ाए | पूजा के बाद कौड़ियो को लाल  कपडे में बांधकर के अपने तिजोरी में चुप चाप रखा दे |

इस दीपावली में माँ लछ्मी की प्रतिमा के सामने आप अपनी चेकबुक, पासबुक  ATM  भी रखे | 2 मिनट के लिए ही सही जरुर रखियेगा |

श्रीयंत्र या लछ्मी यंत्र के पास भी इसको रख सकते है| साथही चंदन और केसर घिस कर के येसा छिराकियेगा की दिखाई न दे |  
पूजा के बाद लछ्मी – गणेश की चांदी की प्रतिमा के साथ  अपने गहने तिजोरी में रखने से बरकत ही बरकत होगी |
शेयर या इंशोरेंस से जुड़े सभी पेपर भी अपने पूजाघर में रखे |
अपने सोने-चांदी के गन्हे भी माँ लछ्मी की प्रतिमा के पास पूजा के समय जरुर रखे |

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lakshmee pooja

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lakshmee pooja  mein rakhee jaane vaalee cheeje


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