Kaal chakra

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कुंडली में किस ग्रह के खराब प्रभाव से जीवन में क्या असर पड़ता है |
छोटी – छोटी उपायों से ख़राब ग्रहों को कैसे ठीक करे |

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Thursday, 12 October 2017

lakshmee pooja mein rakhee jaane vaalee cheeje

16:23 0

laksmi pooja

लक्ष्मी पूजा  date 19-10-2017

दीपावली  में माँ लक्ष्मी के चरणों में क्या रखना चाहिए

लक्ष्मी पूजा में रखी 10 चमत्कारी चीजे |


 दीपावली में माँ लक्ष्मी के सामने एक एक सामान या आपके पूजा साथ में रखा जाता है उसका अपना एक महत्व होता है |  उस महत्व के परिणाम सरूप आपके मन में  नकारात्मक और सकारात्मक  उर्जा का निर्माण होता है | इसके बाद आपका मान जैसा बनता है वोयेसा प्रकृति आपके साथ बेवहार करती है |

       यंत्र राज, श्री यंत्र , लक्ष्मी यंत्र   इस दीपावली माँ लक्ष्मी की प्रतिमा के पास लछमी यंत्र रखे | यंत्र के सामने एक अखंड दीप जलाये कम से कम 24 घंटे के लिए | पुरी पूजा करने के बादइत्र में रुई को गिला कर के छोटी छोटी गोलिया बनाकरयंत्र पर अर्पित करे | पांच तरह के मेवे का भोग लगाए| माँ लक्ष्मी को लाल चुनरीचड़ाए | पूजा के बाद लछ्मी यंत्र अपने धान स्थान या गल्ले में रखे | आपको आर्थिक संकट से मुक्ति मिलेगी, निवेश से लाभ होगा | तीनश्री यंत्र रख सकते है , लेकिन गणेश की मुर्तिया नही होनी चाहिए एक साथ पर |


दीपावली पूजा में माँ लक्ष्मी  के पास श्रीयंत्र की स्थापना कर सकते है | श्रीयंत्र पर कुमकुम, चंदन , गोरोचन, अछत, हलती और केसर अर्पित करे|
शहद से यंत्र का अभिषेक करके गंगाचल अर्पित करे | श्री सुत्राम के मंत्रो का पढ़ते हुए श्री यंत्र का अभिषेक करना चाहिए | श्रीयंत्र पर कमल के फूल अर्पित करनी चाहिए | पान के पते पर गुड़ रखकर भोग लगाना चाहिए |माँ लक्ष्मी को भी कासे की कटोरी में रख कर के शहद अर्पित करना चाहिए | पूजा के बाद अपनी तिजोरी में श्रीयंत्र की स्थापना कर दे |

कारोवार में सचमच नुकसान हो रहा है तो दीपावली की पूजा में कमल गाटे की माला पर लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति स्थापित करके पूजा करे और दुसरे दिन इसे  अपने  तिजोरी में रख ले | कमल गाटेकी माला पर  मूर्ति यैसे रखना चाहिए की वो गिरे नही और अच्छे से रखा जा सके | 
दीपावली पूजा में माँ लक्ष्मी  के पास दछिनावर्ती शंख की स्थापना पीले रंग के रेशमी कपडे पर करे | कहा जाता है की ये शंख बज जाये के सृष्टी में प्रलये आ जायगा | पचामृत से  दछिणावर्ती शंख  का अभिषेक करके गंगाजल अर्पित करे | पीपल के पत्ते पर फल रखकर भोग लगाए |  माँ लछ्मी को काजल की डिब्बी और मिट्टी के 4 दिए जलाकर अर्पित करे | दीपावली के बाद हर दिन दछिनावर्ती शंख की पूजा करे | जिससे आपके घर से दुःख और दरिद्रता दूर हो जायगी |



जिन लोगो का पैसा हमेशा बेकार के कार्यो में खर्च हो जाता है जेसे रोग  बीमारी  दवाई, बेयजपर पैसा  खर्च हो रहा है तो आप ये मान ले की ये आपका दुरभाग है |  कानूनी मामले से परेशान है और उसमे पैसे इतने खर्च हो रहे है जोसमझ में नही आ रही है तो यैसे स्थिति में  घर में दीवापली में  माँ लछ्मी की प्रतिमा के सामने 21 कौड़िया रखनी चाहिए | कौड़ियो का दूध से अभिषेक करके गंगाजाल अर्पित करे | लाल रंग का कपड़ा चढ़ाए | पूजा के बाद कौड़ियो को लाल  कपडे में बांधकर के अपने तिजोरी में चुप चाप रखा दे |

इस दीपावली में माँ लछ्मी की प्रतिमा के सामने आप अपनी चेकबुक, पासबुक  ATM  भी रखे | 2 मिनट के लिए ही सही जरुर रखियेगा |

श्रीयंत्र या लछ्मी यंत्र के पास भी इसको रख सकते है| साथही चंदन और केसर घिस कर के येसा छिराकियेगा की दिखाई न दे |  
पूजा के बाद लछ्मी – गणेश की चांदी की प्रतिमा के साथ  अपने गहने तिजोरी में रखने से बरकत ही बरकत होगी |
शेयर या इंशोरेंस से जुड़े सभी पेपर भी अपने पूजाघर में रखे |
अपने सोने-चांदी के गन्हे भी माँ लछ्मी की प्रतिमा के पास पूजा के समय जरुर रखे |

diwali greetings


lakshmee pooja

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Sunday, 24 September 2017

kaise paan dur karega har sankat

17:14 0


पान  का पता कैसे  बनायागा धनवान



पान का पता कैसे  बनायागा धनवान ? कैसे पान दूर करेगा हर संकट?  चमत्कारी पान के चमत्कारी उपाए |

जब देवी देवताओ दोबारा  समुन्दर मानधन किया गया था
तब भी पान के पते का प्रयोग किया गया था |  इसलिए पान का पता  पूजा पाठ में  i स्तेमाल करते है |
पान खान , दान करना  और  देवी – देवताओ को भेट करना बहुत शुभ फलदायी  होता है |  पान के पते में  अलग अलग  देवी देवताओ का वास भी माना गया है |
पान के समसे निचले हिस्स में माँ  महालछ्मी विराजती है |
 पान के पते के मध्य में माँ  सरस्वती का वास होता है |
पान के उपरी हिस्से में इंद्र और शुक्र का निवास माना जाता है |
कहावत ये है की  आगे लछ्मी  मध्य में आयोर्गाये होता है और बीचे यस और कीर्ति होती है |
पान खाने वाले व्यक्ति की अगला हिशा, बिछला हिसा  और बीच की डंडी निकल देना चाहिए |
इंद्र पराक्रम, शुक्र प्रेम, माँ  सरस्वती सदबूधी, माँ लछमी सम्राध्दी  देती है |  पान में शुव और सूर्य देव का भी वास होता है यहाँ माना चाहता है |
पान शुभता और संपन्नता का प्रतिक है | सुभ कार्य से पहले या पूजा के दोरान  पान के पते के जरिए भगवान का नमन किया  जाता है |
शादी में देरी हो रही है या मनचाहा पत्ति नही मिल पा  रहा है  या  वेवाहिक जीवन में करवाहट बहुत जादा है , तो आप  नवरात्र में  पान में पत्ते पर चंदन और केसर का पाउडर दोनों मिलकर के रखे | और  माँ दिरगा के सामने बैठकर चंडी स्तोत्र का पाठ करे|  पान के पत्ते पर रखे चंदन और केसर पाउडर से  अपने माथे पर तिलक करे|

अगर किसी भी काम को पूरा होने में रूकावटे आ रही है तो  माँ  गुर्गा के मंदिर में पान का बीड़ा चढ़ाए | इस पान में कत्था,  गुलाक्नद, सोंफ, नारियल का बरा और  लौग का जोड़ा रखे | धाय रखे की इस पान में  सुपारी और चुना भुलाक कर के भी न डलवाय |
पान में बम्बकू न डाला जाये तो इस कलुय्ग में आपके लिए बरदान साबित होगा |
कहा जाता है की  कलयुग में  पान लछमी का सवरूप है |
जिनके  जीवन में सुख शान्ति नही है उनको  5 पीपल के पत्ते और 8 पान के पत्ते लाकर के माँ बगलामुखी का ध्यान करते हुए अपने घरकी पूर्व दिशा में कलावे के साथ बांध देना चाहिए |  येसा हर  हफ्ते करे और पुराने पत्तो को नदी में प्रवाहित करे|  

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Monday, 11 September 2017

about dussehra festival

17:02 1
about dussehra

  dussehra festival - 19 october 2018
दशहरा (विजयदशमी या आयुध-पूजा) हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है।अश्विन (क्वार) मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को इसका आयोजन होता है।
भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था तथा देवी दुर्गा ने नौ रात्रि एवं दस दिन के युद्ध के उपरान्त महिषासुर पर विजय प्राप्त किया था। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है।

 इसीलिये इस दशमी को "विजयादशमी" के नाम से जाना जाता है (दशहरा = दशहोरा = दसवीं तिथि)। दशहरा वर्ष की तीन अत्यन्त शुभ तिथियों में से एक है, अन्य दो हैं चैत्र शुक्ल की एवं कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा।

इस दिन लोग शस्त्र-पूजा करते हैं और नया कार्य प्रारम्भ करते हैं (जैसे अक्षर लेखन का आरम्भ, नया उद्योग आरम्भ, बीज बोना आदि)। ऐसा विश्वास है कि इस दिन जो कार्य आरम्भ किया जाता है उसमें विजय मिलती है। प्राचीन काल में राजा लोग इस दिन विजय की प्रार्थना कर रण-यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे। इस दिन जगह-जगह मेले लगते हैं। रामलीला का आयोजन होता है। रावण का विशाल पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है। दशहरा अथवा विजयदशमी भगवान राम की विजय के रूप में मनाया जाए अथवा दुर्गा पूजा के रूप में, दोनों ही रूपों में यह शक्ति-पूजा का पर्व है, शस्त्र पूजन की तिथि है। हर्ष और उल्लास तथा विजय का पर्व है। भारतीय संस्कृति वीरता की पूजक है, शौर्य की उपासक है। व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है। दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों-काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी के परित्याग की सद्प्रेरणा प्रदान करता है।

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Sunday, 10 September 2017

diwali information in hindi

20:38 0
diwali greetings


दीवाली या दीपावली अर्थात "रोशनी का त्योहार" शरद ऋतु (उत्तरी गोलार्द्ध) में हर वर्ष मनाया जाने वाला एक प्राचीन हिंदू त्योहार है। दीवाली भारत के सबसे बड़े और प्रतिभाशाली त्योहारों में से एक है। यह त्योहार आध्यात्मिक रूप से अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है।
भारतवर्ष में मनाए जाने वाले सभी त्यौहारों में दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है। इसे दीपोत्सव भी कहते हैं। तमसो मा ज्योतिर्गमयअर्थात् अंधेरे से ज्योति अर्थात प्रकाश की ओर जाइएयह उपनिषदों की आज्ञा है। इसे सिख, बौद्ध तथा जैन धर्म के लोग भी मनाते हैं। जैन धर्म के लोग इसे महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में मनाते हैं  तथा सिख समुदाय इसे बंदी छोड़ दिवस (en:Bandi Chhor Divas) के रूप में मनाता है।
माना जाता है कि दीपावली के दिन अयोध्या के राजा श्री रामचंद्र अपने चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात लौटे थे।  अयोध्यावासियों का ह्रदय अपने परम प्रिय राजा के आगमन से उल्लसित था। श्री राम के स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दीए जलाए। कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की वह रात्रि दीयों की रोशनी से जगमगा उठी। तब से आज तक भारतीय प्रति वर्ष यह प्रकाश-पर्व हर्ष व उल्लास से मनाते हैं। 

यह पर्व अधिकतर ग्रिगेरियन कैलन्डर के अनुसार अक्टूबर या नवंबर महीने में पड़ता है। दीपावली दीपों का त्योहार है। भारतीयों का विश्वास है कि सत्य की सदा जीत होती है झूठ का नाश होता है। दीवाली यही चरितार्थ करती है- असतो माऽ सद्गमय, तमसो माऽ ज्योतिर्गमय। दीपावली स्वच्छता व प्रकाश का पर्व है। कई सप्ताह पूर्व ही दीपावली की तैयारियाँ आरंभ हो जाती हैं। लोग अपने घरों, दुकानों आदि की सफाई का कार्य आरंभ कर देते हैं। घरों में मरम्मत, रंग-रोगन, सफ़ेदी आदि का कार्य होने लगता है। लोग दुकानों को भी साफ़ सुथरा कर सजाते हैं। बाज़ारों में गलियों को भी सुनहरी झंडियों से सजाया जाता है। दीपावली से पहले ही घर-मोहल्ले, बाज़ार सब साफ-सुथरे व सजे-धजे नज़र आते हैं।
happy diwali 2017


महत्त्व


दीपावली नेपाल और भारत में सबसे सुखद छुट्टियों में से एक है। लोग अपने घरों को साफ कर उन्हें उत्सव के लिए सजाते हैं। नेपालियों के लिए यह त्योहार इसलिए महान है क्योंकि इस दिन से नेपाल संवत में नया वर्ष शुरू होता है।
दीपावली नेपाल और भारत में सबसे बड़े शॉपिंग सीजन में से एक है; इस दौरान लोग कारें और सोने के गहनों के रूप में भी महंगे आइटम तथा स्वयं और अपने परिवारों के लिए कपड़े, उपहार, उपकरणों, रसोई के बर्तन आदि खरीदते हैं। लोगों अपने परिवार के सदस्यों और दोस्तों को उपहार स्वरुप आम तौर पर मिठाइयाँ व सूखे मेवे देते हैं। इस दिन बच्चे अपने माता-पिता और बड़ों से अच्छाई और बुराई या प्रकाश और अंधेरे के बीच लड़ाई के बारे में प्राचीन कहानियों, कथाओं, मिथकों के बारे में सुनते हैं। इस दौरान लड़कियाँ और महिलाऐं खरीदारी के लिए जाती हैं और फर्श, दरवाजे के पास और रास्तों पर रंगोली और अन्य रचनात्मक पैटर्न बनाती हैं। युवा और वयस्क आतिशबाजी और प्रकाश व्यवस्था में एक दूसरे की सहायता करते हैं।

क्षेत्रीय आधार पर प्रथाओं और रीति-रिवाजों में बदलाव पाया जाता है। धन और समृद्धि की देवी - लक्ष्मी या एक से अधिक देवताओं की पूजा की जाती है। दीवाली की रात को, आतिशबाजी आसमान को रोशन कर देती है। बाद में, परिवार के सदस्यों और आमंत्रित दोस्त भोजन और मिठायों के साथ रात को मनाते हैं।


आर्थिक महत्त्व


दीवाली का त्यौहार भारत में एक प्रमुख खरीदारी की अवधि का प्रतीक है। उपभोक्ता खरीद और आर्थिक गतिविधियों के संदर्भ में दीवाली, पश्चिम में क्रिसमस के बराबर है। यह पर्व नए कपड़े, घर के सामान, उपहार, सोने और अन्य बड़ी खरीददारी का समय है। इस त्योहार पर खर्च और खरीद को शुभ माना जाता है क्योंकि लक्ष्मी को, धन, समृद्धि, और निवेश की देवी माना जाता है। दीवाली भारत में सोने और गहने की खरीद का सबसे बड़ा सीजन है।  मिठाई, कैंडी और आतिशबाजी की खरीद भी इस दौरान अपने चरम सीमा पर रहती है। प्रत्येक वर्ष दीवाली के दौरान पांच हज़ार करोड़ रुपए के पटाखों अदि की खपत होती है।

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festival of lights

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Tuesday, 4 July 2017

Pet ki pareshaniyo or sardi khansi kaise dur kare

10:04 0
हींग


✏1. पेट की परेशानियाँ -
 - चुटकी भर हींग को अपने खाने में दाल व सब्जी के साथ जरुर लें।
 - इसके अलावा चुटकी भर हींग को आधा कप पानी में घोल रोज खाने के बाद पियें।

✏2. सर्दी खांसी -
 - कफ होने पर हींग को पानी में घोल पेस्ट बनायें, अब इसे चेस्ट पर लगायें।
 - इसके अलावा आप चुटकी भर हींग को आधी चम्मच अदरक पाउडर व आधी चम्मच शहद के साथ मिलाएं, इस मिक्सचर को दिन में 3 बार लें, कफ से जुडी सारी परेशानियाँ दूर हो जाएँगी।

✏3. सर दर्द मिटाए -
 - चुटकी भर हींग को 1 गिलास पानी में डाल कर गर्म करें, इसे 15 मिनट तक उबलने दें, अब थोड़ा ठंडा कर दिन में कई बार इसे पिएँ।
 - इसके अलावा 1 tsp हींग को कपूर, सूखा अदरक व पीसी काली मिर्च की बराबर मात्रा लेकर मिलाएं। इसमें दूध मिलाकर एक पेस्ट बना लें, अब इस मिक्सचर को सर पर लगायें। इससे टेंशन भी कम होती है व सर दर्द भी चला जाता है।

✏4. दांत दर्द दूर करे -
 - दांत दर्द से तुरंत आराम के लिए हींग का छोटा टुकड़ा लेकर दांत में दबा लें, इससे तुरंत दर्द ठीक हो जायेगा।
 - एक कप पानी में हींग, लोंग डालकर हल्का गर्म करे, अब इससे कुल्ला करें, दांत दर्द ठीक हो जायेगा।
 - इसके अलावा हींग को 2 tsp नीम्बू के रस साथ गर्म करें, इसमें कॉटन डालकर दांत के बीच में रखें।


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Sunday, 2 July 2017

blood ki kami ko dur karne ke upaye

03:28 0

*खून की कमी दूर करने के उपाय व घरेलु नुस्खे :-*


✏— हरी सब्जी खूब खाएँ जैसे पालक, हरी मेथी, चौलाई, बथुआ आदि। इसके अतिरिक्त हरे धनिये की चटनी रोज खाये।
✏— अंगूर के मौसम में ताजे अंगूर नियमित खाने से खून की कमी दूर होकर चेहरे पर लाली आ जाती है। अंगूर में मौजूद आयरन तथा कई विटामिन खून की कमी दूर करने में सक्षम होते है।
✏— फालसा, अनार और केला आदि फलों में आयरन प्रचुर मात्रा में होता है। इन फलों का नियमित सेवन करने से रक्त की कमी दूर होती है।
✏— संतरा , पपीता , आम , आंवला, अंजीर, आदि फल रक्तवर्धक होते है। मौसम आने पर इनका सेवन जरूर करें।
✏— विटामिन C आयरन के अवशोषण के लिए आवश्यक होता है। अतः विटामिन C  किसी भी रूप में अवश्य लें।



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Sunday, 18 June 2017

Pineapple ke anokhe gun

10:54 0
pineapple ke anokhe gun


🍃🍃🍃 *आरोग्यम्* 🍃🍃🍃

*अनानास (Pineapple) -*
अनानास ब्राज़ील का आदिवासी पौधा है। क्रिस्टोफर कोलंबस ने 1493AD में कैरेबियन द्वीप समूह के ग्वाडेलोप नाम के द्वीप में इसे खोजा था और इसे 'पाइना दी इंडीज' नाम दिया। कोलंबस ने यूरोप में अनानास की खेती की शुरुआत की थी। भारत में अनानास की खेती की शुरुआत पुर्तगालियों ने 1548AD में गोवा से की थी। अनानास की डालियाँ काटकर बोने से उग आती हैं।
अनानास का फल बहुत स्वादिष्ट होता है। इसके कच्चे फल का स्वाद खट्टा तथा पके फल का स्वाद मीठा होता है। इसके फल में थाइमिन, राइबोफ्लेविन, सुक्रोस, ग्लूकोस, कैफीक अम्ल, सिट्रिक अम्ल, कार्बोहाईड्रेट तथा प्रोटीन पाया जाता है। आज हम आपको अनानास के कुछ औषधीय गुणों से अवगत कराएंगे -
✏१- अनानास फल के रस में मुलेठी, बहेड़ा और मिश्री मिलाकर सेवन करने से दमे और खाँसी में लाभ होता है।
✏२- यदि शरीर में खून की कमी हो तो अनानास खाने व रस पीने से बहुत लाभ होता है। इसके सेवन से रक्तवृद्धि होती है और पाचनक्रिया तेज़ होती है।
✏३- अनानास के पके फल के बारीक टुकड़ों में सेंधा नमक और काली मिर्च मिलाकर खाने से अजीर्ण दूर होता है।
✏४- अनानास के पत्तों का काढ़ा बनाकर उसमें बहेड़ा और छोटी हरड़ का चूर्ण मिलाकर देने से अतिसार और जलोदर में लाभ होता है।
✏५- अनानास के पत्तों के रस में थोड़ा शहद मिलाकर रोज़ २ मिली से १० मिली तक सेवन करने से पेट के कीड़े ख़त्म हो जाते हैं।
✏६- पके हुए अनानास का रस निकालकर उसे रूई में भिगो कर मसूड़ों पर लगाने से दांतों का दर्द ठीक होता है।




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